भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होकर बंद होने का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ स्थानीय कारोबार पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है। सबसे ज्यादा प्रभावित फल, हरी सब्जी और दूध का व्यवसाय हुआ है, जिससे जुड़े किसान और छोटे व्यापारी भारी संकट का सामना कर रहे हैं।
दरअसल, आसपास के ग्रामीण इलाकों से किसान रोजाना साइकिल और मोटरसाइकिल के जरिए करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर भागलपुर शहर पहुंचते थे। यहां वे अपनी उपज—फल, सब्जियां और दूध—बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। लेकिन सेतु बंद होने के बाद यह पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
अब स्थिति यह है कि कई किसानों को मजबूरी में गंगा नदी पार करने के लिए निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। नाव से आवागमन न सिर्फ समय लेने वाला है, बल्कि इसमें जोखिम भी काफी अधिक है। खासकर खराब मौसम या अधिक भीड़ के दौरान हादसे की आशंका बनी रहती है।
वहीं दूसरी ओर, मालवाहक गाड़ियों को अब लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन में अधिक समय लग रहा है और लागत भी बढ़ गई है। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ना शुरू हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में फल, सब्जी और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इधर ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगातार माइकिंग कर लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी दी जा रही है और विक्रमशिला सेतु की ओर नहीं जाने की अपील की जा रही है। प्रशासन स्थिति को संभालने में जुटा है, लेकिन फिलहाल लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, विक्रमशिला सेतु के बंद होने से न सिर्फ यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि इसका व्यापक असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की आजीविका पर भी पड़ रहा है।
