बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर अपनी सरकार की स्थिरता साबित कर दी। 24 अप्रैल 2026 को बिहार विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में फ्लोर टेस्ट हुआ, जो महज औपचारिकता साबित हुआ क्योंकि सरकार के पास पहले से ही दो-तिहाई से अधिक मजबूत बहुमत मौजूद था।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में एनडीए के पास कुल 201 विधायकों का समर्थन है। इसमें भाजपा के 88, जनता दल यूनाइटेड के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक शामिल हैं। एक सीट खाली होने के कारण सदन में कुल 242 विधायक मौजूद थे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्षी दलों—राजद, कांग्रेस और वाम दलों—ने सरकार पर कई सवाल उठाए और प्रस्ताव का विरोध किया।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और NDA पर तंज कसते हुए कहा, “25 से 30 बोलकर, नीतीश फिनिश।” इस बयान के बाद सदन में काफी हंगामा भी देखने को मिला। कुछ विपक्षी सदस्यों के वॉकआउट की भी चर्चा रही।
हालांकि अंत में ध्वनि मत से सरकार ने बहुमत साबित कर दिया और मत विभाजन की जरूरत ही नहीं पड़ी। AIMIM समेत कुछ छोटे दलों ने भी सम्राट चौधरी को बधाई दी।
डिप्टी सीएम विजय सिंह चौधरी और अन्य NDA नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार द्वारा सत्ता हस्तांतरण लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल है। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का बचाव करते हुए कहा कि बिहार विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल इस फ्लोर टेस्ट के बाद यह साफ हो गया है कि बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार पूरी मजबूती के साथ सत्ता में कायम है।
