मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची इस बार मौसम की बेरुखी से जूझ रही है. तेज धूप, गर्म हवाओं और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव ने फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. बागवानों का कहना है कि फल लगने के अहम समय पर मौसम के असामान्य व्यवहार ने उत्पादन पर सीधा असर डाला है. हालात ऐसे हैं कि यदि मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस साल उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में एक-तिहाई तक घट सकता है.
किसानों के अनुसार, पेड़ों पर लगे लीची के फल सूखने और फटने लगे हैं. बड़े किसान दीपक कुमार बताते हैं कि लगातार सिंचाई और छिड़काव के बावजूद फल बच नहीं पा रहे हैं. पानी देने के कुछ ही देर बाद नमी खत्म हो जा रही है, जिससे कोई खास लाभ नहीं मिल रहा.
वहीं किसान रामप्रीत सिंह का कहना है कि भीषण गर्मी ने लीची के पेड़ों को झुलसा दिया है. सिंचाई के बावजूद वह असर नहीं मिल रहा जो प्राकृतिक बारिश से मिलता है. उनका कहना है कि बारिश से ही लीची में मिठास और गूदापन आता है, लेकिन इस बार फल फट रहे हैं और सूख रहे हैं.
करीब 2.5 एकड़ में लीची की खेती करने वाले कपिल देव राय भी चिंतित हैं. उन्होंने बताया कि पहले मंजर झड़ गए और अब जो फल बचे हैं, वे भी खराब हो रहे हैं. उनका कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा.
मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक विकास कुमार दास ने भी स्थिति को चिंताजनक बताया है. उन्होंने कहा कि तापमान में वृद्धि और बारिश की कमी के कारण फल फट रहे हैं. किसानों को नियमित और कम मात्रा में सिंचाई करने की सलाह दी गई है, ताकि मिट्टी में लगातार नमी बनी रहे.
पिछले सीजन में जिले में 1985 हेक्टेयर में 21,529 मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा हासिल करना मुश्किल दिख रहा है. दुनिया भर में प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर की शाही लीची की गुणवत्ता और स्वाद पर भी असर पड़ सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
