बिहार के अररिया जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां एक उप स्वास्थ्य केंद्र बनकर भी कभी चालू नहीं हो सका। रानीगंज प्रखंड के पचीरा गांव में करीब 6 साल पहले लाखों रुपये की लागत से यह भवन तैयार किया गया था, लेकिन उद्घाटन नहीं होने के कारण आज यह पूरी तरह जर्जर होकर खंडहर में बदल चुका है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब यह भवन बना था तब इसमें सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं—दरवाजे, खिड़कियां, ग्रिल, बेसिन और अन्य सामान लगाए गए थे। लेकिन वर्षों तक बंद रहने के कारण असामाजिक तत्वों ने धीरे-धीरे सब कुछ उखाड़ लिया। अब हालत यह है कि भवन में दरवाजे-खिड़कियां तक नहीं बचे हैं और यह जगह नशेड़ियों का अड्डा बन चुकी है। शाम होते ही यहां संदिग्ध लोगों का जमावड़ा लग जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह स्वास्थ्य केंद्र समय पर चालू हो जाता तो आसपास के गांवों के लोगों को प्राथमिक इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता। फिलहाल किसी के बीमार पड़ने पर करीब 8 किलोमीटर दूर रानीगंज रेफरल अस्पताल जाना पड़ता है, जो काफी परेशानी भरा है।

स्थानीय विधायक अविनाश मंगलम का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को कई बार उठाया है। विधानसभा में भी सवाल किया गया, लेकिन विभागीय स्तर पर गलत जानकारी दी गई कि केंद्र चालू है। विधायक के अनुसार, उन्होंने दोबारा मंत्री को पत्र लिखा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

वहीं स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम संतोष कुमार का कहना है कि भवन पहले से ही जर्जर हालत में मिला था। इसे दोबारा शुरू करने के लिए बड़े स्तर पर मरम्मत और फंड की जरूरत है। फिलहाल पंचायत भवन में सीमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द इस स्वास्थ्य केंद्र का पुनर्निर्माण कर इसे चालू किया जाए, ताकि उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

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