दरभंगा जिले के हायाघाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ. रामचंद्र प्रसाद को सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में पहली बार मंत्री बनने का मौका मिला है। साधारण परिवार से निकलकर राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने वाले डॉ. रामचंद्र प्रसाद की कहानी संघर्ष, मेहनत और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल मानी जा रही है।

 

डॉ. रामचंद्र प्रसाद का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। उनके पिता योगेंद्र प्रसाद गांव में किराना दुकान चलाने के साथ खेती-बाड़ी का काम करते थे। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS से जुड़ गए।

 

राजनीतिक सफर की शुरुआत उन्होंने पंचायत चुनाव से की। जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने का ही परिणाम रहा कि वर्ष 2011 में वे जिला परिषद सदस्य चुने गए। इसके बाद उन्होंने संगठन और क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। भाजपा ने वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन पर भरोसा जताया और हायाघाट सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने राजद के वरिष्ठ नेता भोला यादव को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचने का गौरव हासिल किया।

 

इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित की। क्षेत्र में उनकी पहचान एक साफ-सुथरी छवि वाले ईमानदार और जमीन से जुड़े नेता के रूप में होती है। भाजपा संगठन में उनकी निष्ठा, लंबे समय से पार्टी के प्रति समर्पण और पिछड़े वर्ग में मजबूत पकड़ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है।

 

डॉ. रामचंद्र प्रसाद के मंत्री बनने से हायाघाट सहित पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में खुशी का माहौल है। समर्थकों का कहना है कि एक साधारण परिवार से निकलकर मंत्री बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा है।

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