झारखंड के बोकारो जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां एक जीवित बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि उनकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई और अब वे खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
मामला बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड अंतर्गत दामुडीह पंचायत के गोपीनाथपुर गांव का है। यहां रहने वाले 83 वर्षीय धरनीधर मांझी को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे आज भी जीवित हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
धरनीधर मांझी को वर्ष 2021-22 में वृद्धा पेंशन योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ था। लेकिन वर्ष 2022-23 में पंचायत स्तर पर हुए संयुक्त भौतिक सत्यापन के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनकी पेंशन अचानक बंद कर दी गई।
बुजुर्ग धरनीधर मांझी का कहना है कि उन्होंने कई बार ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित बुजुर्ग भावुक होकर कहते हैं —
“हमरा पेंशन शुरू भेल रहे, लेकिन बाद में कह देल गेल कि हम मर गेलियो। ब्लॉक के चक्कर काट-काट के थक गेलियो हई। हुज़ूर, हम ज़िंदा छी… हमरा जिंदा मानल जाए।”
धरनीधर मांझी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी, उपायुक्त और उप विकास आयुक्त तक आवेदन देकर न्याय की मांग की है। उनका आरोप है कि मुखिया, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कर्मियों की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गलत तरीके से मृत घोषित किया गया।
अब उनकी मांग है कि बंद की गई पेंशन तुरंत बहाल की जाए, बकाया राशि का भुगतान किया जाए और गलत रिपोर्ट देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
लगातार सरकारी दफ्तरों की चौखट पर भटक रहे इस बुजुर्ग की उम्मीद अब प्रशासनिक हस्तक्षेप पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बोकारो प्रशासन कागज़ों में ‘मृत’ घोषित इस जीवित बुजुर्ग को न्याय दिला पाएगा?
संवाददाता : चंदन सिंह, बोकारो
