नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद बिहार में एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। जो नेता पहले इस फैसले के समर्थन में थे, अब वही इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। इसी कड़ी में मोकामा से जदयू विधायक ने बड़ा बयान देते हुए राज्य में शराबबंदी खत्म करने की मांग कर दी है।

शुक्रवार को से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि शराबबंदी पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि “हम पहले शराबबंदी के पक्ष में थे, लेकिन अब हालात अलग हैं। लोग आज भी चोरी-छिपे शराब पी रहे हैं। गांवों में अवैध शराब और गलत नशे का चलन बढ़ गया है। इससे बेहतर है कि सरकार नियंत्रित तरीके से शराब को वैध कर दे।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मुलाकात के दौरान अनंत सिंह ने अपने क्षेत्र मोकामा में एक बेहतर अस्पताल बनाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि इलाके के लोगों को इलाज के लिए पटना आना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से सभी के लिए संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने अस्पताल निर्माण का आश्वासन दिया है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच अनंत सिंह ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह अब आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे और यह उनका आखिरी चुनाव था।

वहीं, के राजनीति में आने और डिप्टी सीएम बनने से इनकार पर उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन वह चाहते थे कि निशांत राजनीति में आएं और अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाएं।

इसके अलावा,  तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए अनंत सिंह ने कहा कि “उनका नाम लेना बेकार है, उनकी पहचान सिर्फ लालू यादव के बेटे के रूप में है।”

इस तरह बिहार की राजनीति में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।

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