बिहार के बेतिया जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने वार्ड संख्या 24 के नगर पार्षद एनामुल हक को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया। यह कार्रवाई दो से अधिक संतान होने की जानकारी छिपाने और गलत शपथ पत्र दाखिल करने के गंभीर आरोपों के आधार पर की गई है।

आयोग ने वाद संख्या 04/2025, जिसमें जेबा जबीं बनाम एनामुल हक मामला शामिल था, सुनवाई पूरी करते हुए यह सख्त फैसला सुनाया। आयोग के अनुसार, एनामुल हक 4 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने के कारण चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थे। इसके बावजूद उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए गलत जानकारी दी और भ्रामक जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर चुनाव जीत लिया।

निर्वाचन आयोग ने बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 18(1)(एम) एवं 18(2) के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया है। साथ ही वार्ड संख्या 24 की सीट को रिक्त घोषित करते हुए दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि एनामुल हक के खिलाफ गलत हलफनामा दाखिल करने और तथ्यों को छिपाने के आरोप में धारा 447 समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आयोग ने जांच में देरी को भी गंभीरता से लिया है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा, वादिनी जेबा जबीं ने एनामुल हक पर पद के दुरुपयोग और नगर निगम बैठकों में हंगामा कर सरकारी कार्यों में बाधा डालने के आरोप भी लगाए थे। आयोग ने इन आरोपों की भी कड़ी निंदा की है।

गौरतलब है कि पहले भी एनामुल हक पर नगर आयुक्त के चेंबर में नग्न होकर हंगामा करने का आरोप लगा था, जिससे यह मामला पहले ही चर्चा में रहा है।

इस सख्त फैसले के बाद बेतिया नगर निगम में हलचल तेज हो गई है और स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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