बोकारो : बोकारो के प्रसिद्ध रक्तगुरु स्वर्गीय डॉ. यू. मोहनलि की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ब्लड सेंटर, बोकारो में आयोजित श्रद्धांजलि एवं रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और रक्तदान कर रक्तगुरु को याद किया। शिविर में कुल 100 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम के दौरान रक्तदाताओं ने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। इसी उद्देश्य के साथ लोग स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए ब्लड सेंटर पहुंचे। आयोजकों का मानना है कि डॉ. यू. मोहनलि ने अपने जीवन में रक्तदान और जरूरतमंदों की मदद के लिए जो प्रेरणा दी, उसे आगे बढ़ाने का यह एक सार्थक प्रयास है।
रक्तदान करने पहुंचे मनीष सिंह ने बताया कि वह अब तक 64 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मौसी कैंसर से पीड़ित थीं और उसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि जरूरत के समय रक्त की कितनी अहम भूमिका होती है। इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से रक्तदान करना शुरू किया। मनीष सिंह ने सभी स्वस्थ लोगों से आगे आकर नियमित रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का रक्तदान किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वहीं, रक्तदाता सुष्मिता ने कहा कि मानव शरीर लगातार रक्त का निर्माण करता है और यदि हम स्वस्थ हैं तो जरूरतमंदों की सहायता के लिए रक्तदान जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक बड़ा सामाजिक कार्य है और अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम से जुड़ना चाहिए। सुष्मिता ने लोगों से रक्तदान के साथ-साथ अंगदान के प्रति भी जागरूक होने और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
सिविल सर्जन अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है। अस्पतालों में कई मरीजों को दुर्घटना, गंभीर बीमारी, ऑपरेशन और अन्य आपात स्थितियों के दौरान रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए समाज के सभी स्वस्थ लोगों को आगे आना चाहिए। सिविल सर्जन ने लोगों से रक्तदान को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे नियमित सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की अपील की। रक्तगुरु डॉ. यू. मोहनलि की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित यह शिविर उनके सेवा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास बनकर सामने आया।







