पटना में डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। राजधानी में इस सीजन डेंगू से पहली मौत की सूचना सामने आई है। मंगलवार को कुर्जी निवासी 30 वर्षीय इंद्रदेव दास की इलाज के दौरान मौत हो गई। इंद्रदेव दास लोयोला हाईस्कूल में कर्मचारी थे और मूल रूप से झारखंड के सिमडेगा के रहने वाले थे।
परिजनों के मुताबिक, पिछले करीब पांच दिनों से इंद्रदेव की तबीयत खराब थी। इसके बाद उन्हें कुर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के दौरान डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान उनके प्लेटलेट्स लगातार गिरते गए और मंगलवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।
हालांकि, पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र मंडल ने मौत को डेंगू से होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि उन्हें फिलहाल मौत की सूचना नहीं मिली है। मौत डेंगू की वजह से हुई है या किसी अन्य कारण से, इसकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सिविल सर्जन के अनुसार सितंबर और अक्टूबर में डेंगू का प्रकोप ज्यादा बढ़ता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से फीवर मास सर्वे कराया जा रहा है। जिन इलाकों में डेंगू के मरीज मिल रहे हैं, वहां फॉगिंग भी कराई जा रही है।
आंकड़ों की बात करें तो 31 अगस्त तक पटना में इस साल डेंगू के 167 मामले सामने आ चुके हैं। अकेले अगस्त महीने में 97 मरीज मिले, जबकि पिछले 10 दिनों में करीब 40 नए मामलों की पुष्टि हुई है। कंकड़बाग, अशोक नगर और हनुमान नगर समेत कई इलाके डेंगू के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दिया जाए। कूलर, गमले, छत पर रखे बर्तन और अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करें। मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और दिन में भी मच्छर से बचाव के उपाय करें।
डेंगू होने पर पर्याप्त मात्रा में पानी, तरल पदार्थ और ओआरएस लेते रहें। बुखार की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल लिया जा सकता है। वहीं एस्पिरिन और बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं से बचना जरूरी है।





