मोतिहारी: नेपाल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के बीच एक और बड़ी मुसीबत सामने आई है। धादिंग जिले में कृष्णाभीर के पास रविवार सुबह पृथ्वी राजमार्ग का करीब 20 मीटर हिस्सा अचानक धंसकर टूट गया। सड़क के क्षतिग्रस्त होने के बाद मुगलिंग और काठमांडू के बीच वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। इससे भारत और नेपाल के बीच होने वाला व्यापार और परिवहन भी प्रभावित हुआ है।
बताया जा रहा है कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर फटने के बाद भारी बारिश, नदियों के बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने नेपाल के कई इलाकों में तबाही मचा रखी है। अब इसका असर काठमांडू को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है।
पृथ्वी राजमार्ग भारत-नेपाल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग भारत से वीरगंज, हेटौडा, नारायणघाट और मुगलिंग होते हुए काठमांडू को जोड़ता है। सड़क टूटने से मालवाहक वाहनों के साथ-साथ आम यात्रियों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
सबसे बड़ी चिंता एलपीजी गैस, पेट्रोल, डीजल और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर है। भारत से नेपाल पहुंचने वाली रसोई गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से होकर काठमांडू पहुंचती है। ऐसे में सड़क बाधित होने के बाद राजधानी और आसपास के इलाकों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ गई है।
नेपाल सरकार ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरी कुमारी के मुताबिक, कृष्णाभीर से पहले स्थित गैस बॉटलिंग प्लांट में बुलेट टैंकरों से एलपीजी उतारी जाएगी। इसके बाद सिलेंडरों में गैस भरकर काठमांडू और जरूरत वाले इलाकों में भेजने की व्यवस्था की जा रही है। पेट्रोल और डीजल के लिए भी दूसरे मार्गों का इस्तेमाल करने की तैयारी है।
सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के बावजूद देश में ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि लगातार खराब मौसम, बढ़ते जलस्तर और क्षतिग्रस्त सड़कों के बीच राहत, आपूर्ति और यातायात बहाल करना बड़ी चुनौती बन गया है।
वहीं, सरकारी आंकड़ों के अनुसार नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ और आपदा में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 781 पहुंच गया है, जबकि करीब 3 हजार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।







