सहरसा नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर शुक्रवार को पटना से पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम सहरसा पहुंची। टीम ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर विभिन्न योजनाओं, कार्यादेशों और वित्तीय अभिलेखों की जांच शुरू कर दी। जांच टीम के कार्यालय पहुंचते ही निगम कर्मियों में हलचल तेज हो गई।
जानकारी के अनुसार, यह जांच पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन की ओर से नगर निगम की योजनाओं में कथित सरकारी धन के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता, निविदा शर्तों के उल्लंघन समेत अन्य मामलों को लेकर दिए गए परिवाद के आधार पर की जा रही है।
विभागीय आदेश के तहत जांच के लिए संयुक्त सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में अवर सचिव परमानंद पाण्डेय, अधीक्षण अभियंता हरेंद्र उपाध्याय, सहायक अभियंता अखिलेश कुमार और ट्रेजरी ऑफिसर को शामिल किया गया है।
परिवाद में वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न स्रोतों से होने वाली बंदोबस्ती और नगर निगम की कई योजनाओं में कथित अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में 15 लाख रुपये से कम राशि की योजनाओं को अलग-अलग हिस्सों में बांटने, अवैध पार्किंग और टोल वसूली सहित कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा पटेल मैदान स्थित निर्माणाधीन पार्क, वार्ड संख्या-13 के आईडी सिंह चौक के समीप पोखर जीर्णोद्धार, शाहपुर गांव में पार्क निर्माण एवं पोखर जीर्णोद्धार तथा व्यवहार न्यायालय पार्क से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
विभाग ने नगर आयुक्त से संबंधित योजनाओं के अभिलेख, कार्यादेश और संचिकाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। वर्तमान नगर आयुक्त के प्रभार ग्रहण करने के बाद जारी सभी कार्यादेशों से संबंधित योजनाओं की सूची भी जांच टीम ने मांगी है।
समिति को 15 दिनों के भीतर स्पष्ट मंतव्य के साथ जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित अवधि में रिपोर्ट नहीं मिलने के बाद टीम शुक्रवार को सहरसा पहुंची और जांच शुरू की।
फिलहाल जांच टीम के अधिकारियों ने मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है। टीम विभिन्न फाइलों और अभिलेखों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।






