बिहार के नालंदा से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जिले के राजकीय पॉलिटेक्निक अस्थावां के छात्रों ने ऐसी अनोखी मशीन बनाई है, जो किसानों की मेहनत और शारीरिक परेशानी दोनों को कम करेगी। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के चार छात्रों—ओम प्रकाश, विशाल, शिवम और धीरज—ने प्रोफेसर रितेश कुमार के मार्गदर्शन में ‘व्हील-ड्रिवन मैकेनिकल पेस्टीसाइड स्प्रेयर’ तैयार किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना बिजली, बैटरी या पेट्रोल के काम करता है।
इस मशीन को बनाने की प्रेरणा छात्र ओम प्रकाश को अपने किसान पिता से मिली। उन्होंने अपने पिता को भारी कीटनाशक टंकी पीठ पर लादकर खेतों में दवा छिड़कते देखा था। लगातार ऐसा करने से किसानों को सर्वाइकल पेन और मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए छात्रों ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया।
ट्रॉली की तरह दिखने वाली इस मशीन में पहिए की रोटेशनल एनर्जी का इस्तेमाल किया गया है। जैसे ही किसान मशीन को खेत में आगे बढ़ाता है, पहिया घूमता है और चेन के जरिए पंप सक्रिय हो जाता है। ‘स्लाइडर क्रैंक मैकेनिज्म’ की मदद से पंप में दबाव बनता है और नोजल से दवा का छिड़काव शुरू हो जाता है। इससे किसानों को हाथ से पंप चलाने या पीठ पर भारी वजन ढोने की जरूरत नहीं पड़ती।
छात्रों ने डेढ़ महीने की मेहनत, रिसर्च और वर्कशॉप में वेल्डिंग-कटिंग के जरिए इसका प्रोटोटाइप तैयार किया। अब टीम इस मशीन को और आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। इसमें गियर बॉक्स, फोल्डेबल नोजल और IoT सेंसर जोड़ने की योजना है, ताकि मशीन जरूरत वाले पौधों पर ही दवा का छिड़काव कर सके।
संस्थान के प्राचार्य डॉ. आनंद कृष्णा ने इस नवाचार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया है। कॉलेज प्रशासन को उम्मीद है कि सरकार या किसी कंपनी के सहयोग से इस तकनीक को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारा जाएगा, जिससे गरीब किसानों को बड़ा फायदा मिल सके।
