पटना: बिहार में इस बार मानसून की बेरुखी ने चिंता बढ़ा दी है। जुलाई में सामान्य 340.5 मिमी के मुकाबले सिर्फ 203 मिमी बारिश हुई। वहीं अगस्त में अब तक 573.4 मिमी के मुकाबले करीब 369 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। यानी अगस्त में बारिश करीब 38 फीसदी कम है। 2020 के बाद यह लगातार छठा साल है, जब जुलाई में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
कम बारिश का सीधा असर बिहार की नदियों पर पड़ा है। जल संसाधन विभाग राज्य की 81 नदियों के जलस्तर की निगरानी 117 स्थानों पर करता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 26 नदियों में इतना पानी भी नहीं है कि उसकी मापी की जा सके। इनमें 10 नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं। नालंदा में लौकाईन, मोहाने, नोनई, पंचाने, गोइठवा, पैमार, चिरैया और भूतही जैसी नदियां सूखी हैं। पटना में दरधा और कररूआ में भी पानी नहीं है।
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ा है। धान की रोपनी प्रभावित हुई है और किसान फसल बचाने के लिए बिजली या डीजल से पटवन करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, नेपाल में भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति है, जबकि बिहार के कई हिस्सों में नदियां सूखने की कगार पर हैं।
कम बारिश का असर भूजल स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। पीएचईडी के आंकड़ों के अनुसार कई जिलों में पिछले साल की तुलना में भूजल दो से तीन फीट तक नीचे चला गया है। अरवल में यह 22.6 से बढ़कर 24.4 फीट, सासाराम में 24.8 से 27.4 फीट, भागलपुर में 23.9 से 26.5 फीट और गया में 36.3 से बढ़कर 39 फीट नीचे पहुंच गया है।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि नदियों से गाद निकालने का काम किया जाएगा, जिससे उनकी गहराई बढ़े और पानी लंबे समय तक जमा रह सके। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बिहार के अधिकांश जिलों में बारिश का पूर्वानुमान जताया है। ऐसे में नदियों और भूजल की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।






