आस्था: लोक आस्था का महापर्व बिहार में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गई है। साल में दो बार मनाए जाने वाले इस पर्व का विशेष महत्व है, जिसमें एक कार्तिक मास में और दूसरे चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। चैती छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रती निर्जला उपवास व्रत सूर्य के बाद खरना की पूजा करेंगे। इसके बाद तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य और चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने से यह चार दिव्य महापर्व का अर्घ्य होगा।
जिले के देव स्थित इस अवसर पर आश्रमों की भारी भीड़ उमड़ती है। सूर्य नगरी के नाम से प्रसिद्ध इस स्थल पर इस बार पांच से सात लाख लोगों की पहुंच का अनुमान है। देश-विदेश से यहां आए भगवान सूर्य के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
जिला प्रशासन ने मेले को लेकर व्यापक खंड बनाए हैं। आवास स्थल, बैरिकेडिंग, ड्रॉप गेट, कैरिज, स्वास्थ्य शिविर, एम्बुलेंस, जहाजरानी, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की व्यवस्था की गई है। साथ ही सुरक्षा के लिहाज से बड़ी संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारी और अधिकारी शामिल हैं। पूरे मेले क्षेत्र की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की घटना से बचा जा सके। प्रशासन ने वैभवशाली आभूषण भंडार न आने की भी अपील की है।
देव सूर्य मंदिर को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु ने एक ही रात में किया था। यह मंदिर अपने खास ढांचे के लिए भी जाना जाता है, क्योंकि इसका मुख पूर्व की बजाय पश्चिम दिशा में है, जो इसे देश के अन्य सूर्य मंदिरों से अलग बनाता है।
हर साल की तरह इस बार भी चैती छठ पर देव में आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
