नशा मुक्त समाज की दिशा में एक मजबूत पहल करते हुए सहरसा में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत दो दिवसीय खेल प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने खेल और जागरूकता को एक साथ जोड़कर युवाओं को एक सकारात्मक दिशा देने का काम किया।
18 और 19 मार्च 2026 को खेल भवन में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य साफ था—खेल के जरिए बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें स्वस्थ जीवन के प्रति प्रेरित करना। कार्यक्रम का उद्घाटन DRDA के निदेशक और सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा द्वारा किया गया, जहां उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।
पहले दिन शतरंज प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने अपनी मानसिक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। अंडर-09, अंडर-13 और ओपन एज ग्रुप में मुकाबले हुए, जहां हर चाल में रणनीति और धैर्य देखने को मिला। छोटे बच्चों से लेकर युवाओं तक, सभी ने खेल के जरिए यह साबित किया कि असली जीत दिमाग और अनुशासन की होती है, न कि नशे की आदतों की।
दूसरे दिन माहौल पूरी तरह बदल गया, जब मैदान में कबड्डी और वुशु के रोमांचक मुकाबले हुए। कबड्डी में अंडर-17 और ओपन ग्रुप के लड़के-लड़कियों ने दमखम दिखाया, वहीं वुशु में अंडर-14 और अंडर-19 खिलाड़ियों ने अपनी फुर्ती और तकनीक से दर्शकों को प्रभावित किया।
कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया। संदेश साफ था—नशा शरीर और भविष्य दोनों को बर्बाद करता है, जबकि खेल जीवन को संवारता है।
सभी प्रतिभागियों को ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की टी-शर्ट दी गई, जबकि विजेताओं को मेडल, पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह आयोजन सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की झलक था, जहां युवा खुद बदलाव की मिसाल बनते नजर आए।
