दिल्ली: राम मंदिर में चंदे के कथित गबन के मुद्दे को लेकर बिहार के पूर्णिया सांसद पप्पू यादव एक बार फिर सड़क पर उतर गए। दिल्ली के मंडी हाउस में उन्होंने साधु-संतों के साथ प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से मामले की जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की योजना प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें मंडी हाउस में ही रोक दिया।
पुलिस की कार्रवाई के विरोध में पप्पू यादव सड़क पर लेट गए और साधु-संतों के साथ प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। पप्पू यादव ने मांग की कि राम मंदिर में चंदे के कथित गबन की जांच सीबीआई की निगरानी में कराई जाए और मंदिर से कथित तौर पर भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को हटाकर संतों को जिम्मेदारी दी जाए।
पप्पू यादव ने कहा कि साधु-संत पूरे देश के मंदिरों की पवित्रता और धार्मिक संस्थानों की व्यवस्था को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस लड़ाई में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव भी संतों के साथ खड़े हैं। सांसद ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मामले पर चुप रहती है, तो साधु-संत बड़े स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से जुड़े कुछ साधु-संत भी शामिल थे। पुलिस ने धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को मंडी हाउस से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और कई लोगों को हिरासत में लेकर बाद में दूसरी जगह छोड़ दिया।
पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री को साधु-संतों से आखिर किस बात का डर है। इससे पहले भी पप्पू यादव संसद परिसर के मकर द्वार पर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने पुजारी का वेश धारण कर चंदा चोरी के मुद्दे पर नुक्कड़ नाटक जैसा प्रदर्शन किया था।
इस मुद्दे को लेकर पप्पू यादव लगातार केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर हमलावर हैं और अब साधु-संतों के साथ सड़क पर उतरकर उन्होंने इस विवाद को फिर से राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र में ला दिया है।






