22 साल देश सेवा के बाद तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचे जवान संजीव कुमार , मासूम बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि

मुंगेर के वासुदेवपुर माली टोला निवासी भारतीय सेना के हवलदार संजीव कुमार का लखनऊ के कमान अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। 41 वर्षीय संजीव कुमार पिछले करीब 22 वर्षों से भारतीय सेना में सेवा दे रहे थे। लीवर में गंभीर समस्या के बाद उनका इलाज चल रहा था। रविवार को उनका ऑपरेशन भी हुआ था, लेकिन इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई और सोमवार देर रात करीब दो बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

संजीव कुमार के निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव में मातम पसर गया। सेना के जवान उनके पार्थिव शरीर को ताबूत में रखकर एंबुलेंस से मुंगेर लेकर पहुंचे। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जैसे ही घर पहुंचा, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

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बताया गया कि संजीव कुमार वर्ष 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह ओडिशा के गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में तैनात थे। उनके परिवार में पत्नी पूनम देवी और दो बच्चे हैं।

अंतिम विदाई के दौरान सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब संजीव कुमार के दोनों मासूम बच्चे तिरंगे में लिपटे अपने पिता के पार्थिव शरीर के सामने खड़े होकर उन्हें सलाम करते नजर आए। पिता को अंतिम सलामी देते बच्चों को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

सैन्य सम्मान के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। संजीव कुमार के महज पांच वर्षीय बेटे योगेश राज ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों का कलेजा भर आया।

अंतिम विदाई के लिए गया से सेना की यूनिट के जवान भी मुंगेर पहुंचे। सैन्य दल ने पूरे सम्मान के साथ हवलदार संजीव कुमार को अंतिम सलामी दी। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए और ‘शहीद संजीव कुमार अमर रहें’ के नारे लगाते हुए श्रद्धांजलि दी।

देश की सेवा में करीब 22 वर्ष बिताने वाले संजीव कुमार की अंतिम विदाई ने पूरे वासुदेवपुर को गमगीन कर दिया। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर और मासूम बेटे द्वारा पिता को दी गई अंतिम विदाई का दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया।

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