पटना में नगर निकाय के सफाई कर्मियों और दैनिक मजदूरों की हड़ताल लगातार आठवें दिन भी जारी रहने से राजधानी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर की सड़कों, गलियों, बाजारों और मोहल्लों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। नगर निगम के अनुसार पिछले सात दिनों में करीब 900 टन से अधिक कचरा जमा हो चुका है। लगातार बारिश के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। गीले कचरे से उठती दुर्गंध, जलजमाव और गंदगी से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच पटना नगर निगम ने सफाई कर्मियों की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने, पात्र दैनिक सफाई कर्मियों के नियमितीकरण तथा समान वेतन, एसीपी और एमएसीपी से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया। निगम ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर होगा और प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
महापौर सीता साहू ने कहा कि सफाई कर्मियों की अधिकांश मांगें नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, लेकिन निगम सरकार से लगातार बातचीत कर रहा है। वहीं नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने उम्मीद जताई कि सकारात्मक वार्ता के बाद जल्द ही हड़ताल समाप्त होगी और सफाई व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।
दूसरी ओर, हड़ताल का नेतृत्व कर रहे मोहन पासवान ने कहा कि यह आंदोलन केवल वेतन का नहीं, बल्कि सम्मान और स्थायी रोजगार का है। उनका कहना है कि वर्षों से काम करने के बावजूद हजारों सफाई कर्मी अस्थायी स्थिति में हैं और जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। सफाईकर्मी कांति देवी ने भी स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग दोहराते हुए कहा कि हर मौसम में शहर की सफाई करने के बावजूद उन्हें नौकरी की सुरक्षा और सम्मान नहीं मिला है।
हड़ताल का असर कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, बोरिंग रोड, पटना सिटी, अशोक राजपथ, कदमकुआं, गर्दनीबाग, अनीसाबाद और बेली रोड समेत कई इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर से लोगों को नाक-मुंह ढककर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द सफाई शुरू नहीं हुई तो डेंगू, मलेरिया, डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।






