अब अंतरिक्ष से होगी कोसी पर नजर! ISRO की सैटेलाइट तकनीक से बिहार में बाढ़ प्रबंधन होगा और मजबूत


बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है, खासकर कोसी नदी के कारण। इस बार राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए पहली बार अंतरिक्ष तकनीक का सहारा लिया है। इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के सहयोग से नेपाल और भारत से सटे कोसी बेसिन की सैटेलाइट के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है।

इस आधुनिक व्यवस्था के तहत करीब 6,960 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। नेपाल में होने वाली भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और तटबंधों पर बढ़ते दबाव की जानकारी सीधे जल संसाधन विभाग के कंट्रोल रूम तक पहुंच रही है। इससे समय रहते अलर्ट जारी कर राहत और बचाव कार्यों को तेज किया जा सकेगा।

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जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर बाढ़ प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समय पर सूचना मिलने से लोगों को पहले ही सतर्क किया जा सकेगा।

इसरो के सर्वे के अनुसार वर्ष 2015 से 2020 के बीच कोसी बेसिन का जलमग्न क्षेत्र 815 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 5,503.5 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसका सबसे अधिक असर भागलपुर, खगड़िया, कटिहार, दरभंगा और समस्तीपुर जैसे जिलों पर पड़ रहा है।

नेपाल से निकलने वाली कोसी नदी भारी मात्रा में गाद और बालू लाती है तथा बार-बार अपना रास्ता बदलती है। इसी वजह से इसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए नेपाल के साथ बेहतर समन्वय और बहुउद्देश्यीय डैम का निर्माण जरूरी है।

सरकार ने इस वर्ष 447.36 करोड़ रुपये की लागत से 216 बाढ़ रोधी कार्य पूरे किए हैं। 24 घंटे संचालित बाढ़ सहायता केंद्र, टोल फ्री नंबर 1800-345-6145 और प्रमुख नदियों के 43 स्थानों पर 72 घंटे पहले बाढ़ पूर्वानुमान की व्यवस्था भी शुरू की गई है।

सरकार का दावा है कि आधुनिक तकनीक, समय पर चेतावनी और भारत-नेपाल के बेहतर समन्वय के जरिए इस बार बाढ़ के प्रभाव को कम करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

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