कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की ताज़ा बढ़ोतरी ने होटल और रेस्तरां उद्योग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पहले से ही गैस सिलेंडर की किल्लत और अनियमित सप्लाई से जूझ रहे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर अब यह नया आर्थिक बोझ पड़ गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा और आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।
होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि अधिकांश कमर्शियल किचन में एलपीजी का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। ऐसे में गैस की कीमतों में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी के बाद उनके पास खर्च कम करने के बहुत सीमित विकल्प बचे हैं। कई होटलों और रेस्तरां ने पहले ही अपने मेन्यू में कटौती शुरू कर दी है और उन व्यंजनों को हटाया जा रहा है, जिन्हें पकाने में ज्यादा गैस और अधिक समय लगता है।
ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन राजन सहगल ने कहा कि इस बढ़ोतरी का असर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर साफ दिखाई देगा। उनका कहना है कि अगर कोई ग्राहक अभी 1000 रुपये में भोजन कर रहा है, तो उसे आने वाले समय में लगभग 1300 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। यानी एक सामान्य परिवार के बाहर खाने का बजट भी बढ़ जाएगा।
दिल्ली के होटल व्यवसायी और उद्योग विशेषज्ञ प्रणय अनेजा ने बताया कि फिलहाल होटल और रेस्तरां उद्योग इस बढ़ी हुई लागत का आकलन कर रहा है। उसी के आधार पर मेन्यू की नई कीमतें तय की जाएंगी। कई संस्थान अभी अंतिम फैसला लेने से पहले बाजार की स्थिति को समझने में जुटे हैं।
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मानद कोषाध्यक्ष गरिष ओबेरॉय ने कहा कि इसका असर सिर्फ बड़े होटलों और रेस्तरां तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे ढाबों, ठेलों और चाय बेचने वालों तक भी पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 10 रुपये में चाय पीकर राहत महसूस करता था, अब उसे उसी चाय के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
उद्योग विशेषज्ञ राकेश रॉय ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी की बढ़ी कीमतें और अनियमित सप्लाई उद्योग के लिए दोहरा संकट बन गई हैं। कच्चे माल, ईंधन और सप्लाई चेन की बढ़ती लागत ने होटल और रेस्तरां कारोबार को भारी दबाव में ला दिया है। आने वाले दिनों में इसका असर सीधे ग्राहकों की थाली और जेब दोनों पर दिखेगा।
