पलामू/झारखंड – पांकी थाना क्षेत्र के गजबोर स्थित एक निजी क्लीनिक में इलाज के बाद 7 वर्षीय मासूम की मौत से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक की पहचान पांकी बस्ती निवासी अमित कुमार के पुत्र हर्ष कुमार के रूप में हुई है।
परिजनों का आरोप है कि हर्ष का इलाज डॉ. बिरेंद्र के क्लीनिक में डॉक्टर के बजाय कंपाउंडर द्वारा किया गया। बच्चे को तेज बुखार और उल्टी की शिकायत पर क्लीनिक ले जाया गया था। इलाज के बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों ने स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टर को बुलाने की मांग की, लेकिन आरोप है कि समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुए।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि डॉ. बिरेंद्र आयुष चिकित्सक के रूप में चतरा जिले में सरकारी सेवा में पदस्थापित हैं। ऐसे में उनकी ड्यूटी चतरा में होने के बावजूद पांकी में निजी क्लीनिक कैसे संचालित हो रहा है? और उनकी अनुपस्थिति में क्लीनिक में कौन मरीजों का इलाज करता है? परिजनों का साफ कहना है कि क्लीनिक में कंपाउंडर ही मरीजों का इलाज करते हैं।
परिजनों के अनुसार सोमवार सुबह करीब 8 बजे हर्ष की हालत और ज्यादा बिगड़ गई। आनन-फानन में उसे बेहतर इलाज के लिए डाल्टनगंज ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना के बाद परिजनों ने क्लीनिक प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम लगनी चाहिए।
इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। वहीं पांकी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।






