झारखंड आंदोलन के प्रखर नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक एवं आदिवासी अस्मिता के प्रतीक रहे शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी और उत्साह का माहौल है। विशेषकर संथाल परगना, कोयलांचल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में झामुमो कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे झारखंड आंदोलन के संघर्षों को मिला राष्ट्रीय सम्मान बताया है।
झामुमो धनबाद जिला व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हरीश सिंह ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासियों के अधिकारों तथा अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर संघर्ष में समर्पित कर दिया था। उनके नेतृत्व और संघर्षों के कारण ही झारखंड राज्य के निर्माण का सपना साकार हो सका।
उन्होंने कहा कि पद्म भूषण सम्मान केवल शिबू सोरेन को नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों को समर्पित है जिन्होंने झारखंड आंदोलन को सफल बनाने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। यह सम्मान राज्य के गौरव, आदिवासी समाज की पहचान और सामाजिक न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता का प्रतीक है।
हरीश सिंह ने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता दिशोम गुरु के विचारों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए राज्य के समावेशी विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से सरकार समाज के सभी वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
सम्मान की घोषणा के बाद धनबाद सहित राज्य के विभिन्न जिलों में झामुमो कार्यकर्ताओं ने खुशी जाहिर की और इसे झारखंड के इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को भी संघर्ष, समर्पण और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित करता रहेगा।
संवाददाता : नीतीश कुमार








