मत्स्यगंधा झील विकास कार्यों पर उठे सवाल, गुणवत्ता जांच और संतुलित विकास की मांग

सहरसा जिले की पहचान और प्रमुख पर्यटन स्थल मत्स्यगंधा झील में चल रहे विकास कार्यों को लेकर कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष सह अधिवक्ता विनोद कुमार झा एवं संरक्षक सह पूर्व जिला पार्षद प्रवीण आनंद ने मंगलवार को झील परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और परियोजना की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा विकास की दिशा पर चिंता व्यक्त की।

 

निरीक्षण के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि करोड़ों रुपये की लागत से झील का विकास कार्य कराया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में अधिकांश निर्माण गतिविधियां झील के केवल एक हिस्से तक सीमित दिखाई दे रही हैं। इससे झील के समग्र एवं संतुलित विकास की अवधारणा प्रभावित हो सकती है। मोर्चा ने मांग की कि झील के दोनों किनारों का समान रूप से विकास एवं सौंदर्यीकरण सुनिश्चित किया जाए।

 

प्रवीण आनंद ने कहा कि मत्स्यगंधा झील के चारों ओर विकास कार्य होने चाहिए तथा प्रस्तावित ग्लास ब्रिज को झील के इस पार से उस पार तक बनाया जाना चाहिए, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और झील का आकर्षण बढ़े।

 

जानकारी के अनुसार झील परिसर में लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से ग्लास ओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि अन्य विकास कार्यों पर करीब 75 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। परियोजना में 350 मीटर लंबी सीढ़ी, संपर्क पथ, फूड कोर्ट, एक्सपीरियंस सेंटर और दुकानों के निर्माण की योजना शामिल है।

 

निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में प्रयुक्त ईंटों की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर निम्न गुणवत्ता वाली ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से निर्माण सामग्री की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

 

मोर्चा ने यह भी मांग की कि परियोजना की कुल लागत, स्वीकृत नक्शा, डिजाइन और कार्य प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही यदि घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

 

मोर्चा ने कहा कि मत्स्यगंधा झील सहरसा की ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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