बक्सर: बक्सर-पटना फोरलेन पर चुरामनपुर से सिंडिकेट गोलंबर के बीच इन दिनों यातायात व्यवस्था बदहाल है। चार लेन की सड़क पर ट्रकों की लंबी कतारों के कारण महज दो किलोमीटर की दूरी तय करने में ढाई घंटे तक लग रहे हैं। जाम में स्कूली बसें और छोटे वाहन फंस रहे हैं, वहीं एंबुलेंस को भी रास्ता निकालने में परेशानी हो रही है। हालात ऐसे हैं कि कई वाहन चालक मजबूरी में विपरीत लेन में गाड़ियां चला रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने में प्रशासन अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रहा है। औद्योगिक थाना क्षेत्र के चिकित्सक डॉ. एसएन सिंह और स्थानीय युवा प्रशांत तिवारी ने लेन अनुशासन की कमी पर सवाल उठाए हैं। प्रशांत तिवारी का कहना है कि हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया चालकों पर कार्रवाई होती है, लेकिन फोरलेन पर अव्यवस्थित तरीके से चल रहे भारी वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं किया जा रहा है।
एक साल पहले मिली थी जाम से राहत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब एक साल पहले तत्कालीन पुलिस कप्तान शुभम आर्य की पहल पर टोल प्लाजा से ट्रकों को नियंत्रित तरीके से एक-एक कर छोड़ा गया था। इस व्यवस्था से जाम कम हुआ था। अब लोग उसी व्यवस्था को दोबारा लागू करने और नियमित निगरानी की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय समाजसेवी कृष्णा शर्मा का दावा है कि जनवरी से अब तक इस सड़क खंड पर 100 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं और 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कुछ बालू कारोबारियों के वाहनों को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जनप्रतिनिधि भी जाम से परेशान
सरपंच संघ अध्यक्ष अखिलेश चौबे को भी दो किलोमीटर की दूरी तय करने में ढाई घंटे लग गए। अंततः उन्होंने गाड़ी किनारे खड़ी कर पैदल निकलना उचित समझा। ट्रैफिक डीएसपी ने शुरुआत में जाम से इनकार किया, लेकिन तस्वीरें भेजे जाने के बाद थाना प्रभारी को मौके पर भेजा गया।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से छोड़ा जाए, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात हो और एंबुलेंस तथा स्कूल बसों के लिए रास्ता सुनिश्चित किया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।






