मुजफ्फरपुर: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी और संतोष सहनी से जुड़े कथित चुनाव चिह्न दुरुपयोग मामले में नया मोड़ आया है। मुजफ्फरपुर के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-11 डॉ. किशोर कुणाल की अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी सीजेएम कोर्ट द्वारा परिवाद खारिज करने के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही मामले को दोबारा सुनवाई के लिए निचली अदालत में भेजने का निर्देश दिया है।
यह मामला भारतीय सार्थक पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सुधीर कुमार ओझा द्वारा दर्ज कराए गए परिवाद से जुड़ा है। ओझा का आरोप है कि निर्वाचन आयोग द्वारा उनकी पार्टी को आवंटित नाव चुनाव चिह्न का महागठबंधन के राजनीतिक कार्यक्रमों, बैनर और पोस्टरों में कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। परिवादी के मुताबिक, 31 मार्च 2024 को भी इस चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इससे उनकी पार्टी को आर्थिक और राजनीतिक नुकसान हुआ।
सुधीर कुमार ओझा ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान नाव चुनाव चिह्न के कथित दुरुपयोग के खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, 20 जनवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट ने उनका परिवाद खारिज कर दिया था। इसके बाद ओझा ने अपने अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता के माध्यम से जिला अदालत में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।
सत्र न्यायालय ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए सीजेएम कोर्ट के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया। अब मामले में शिकायतकर्ता का शपथ पर बयान दर्ज किया जाएगा। इसके लिए सुधीर कुमार ओझा को 29 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
एमपी-एमएलए कोर्ट में जा सकता है मामला
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि पहले जांच की जाए कि आरोपितों में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद अथवा विधायक है या नहीं। यदि मामला एमपी-एमएलए विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो इसे संबंधित अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा। ऐसा नहीं होने पर निचली अदालत को तीन महीने के भीतर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
फिलहाल, अदालत के आदेश से मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता खुल गया है। आरोपों पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।






