पटना में कोचिंग संस्थान विवाद से जुड़े मामले में चर्चित शिक्षक खान सर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर नया कानूनी मोड़ सामने आ सकता है। खबर है कि उनकी कानूनी टीम पटना हाईकोर्ट में एफआईआर क्वैशिंग पिटीशन दायर करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर एफआईआर क्वैशिंग पिटीशन क्या होती है और किन परिस्थितियों में हाईकोर्ट किसी एफआईआर को रद्द कर सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को न तो पुलिस और न ही निचली अदालत सीधे समाप्त कर सकती है। हालांकि हाईकोर्ट को विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जिनके तहत वह अपने अंतर्निहित अधिकारों का उपयोग करते हुए एफआईआर या आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर सकता है। इसी प्रक्रिया को एफआईआर क्वैशिंग पिटीशन कहा जाता है।
पटना हाईकोर्ट की अधिवक्ता पुतुल सिन्हा बताती हैं कि हाईकोर्ट के पास न केवल एफआईआर रद्द करने का अधिकार है, बल्कि वह जांच पर अंतरिम रोक लगाने या गिरफ्तारी से अस्थायी राहत देने का भी आदेश दे सकता है। हालांकि अदालत ऐसा तभी करती है जब प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हो कि याचिकाकर्ता के पक्ष में मजबूत कानूनी आधार मौजूद है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में चल रही है और खान सर को पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत मिली हुई है। अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित है। ऐसे में वे संविधान के अनुच्छेद 226 और बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की मांग कर सकते हैं।
पुतुल सिन्हा के अनुसार, हाईकोर्ट यह देखता है कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों को यदि पूरी तरह सही भी मान लिया जाए, तब भी क्या कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। यदि शिकायत दुर्भावनापूर्ण हो, कानून का दुरुपयोग किया गया हो या आरोपों से अपराध सिद्ध नहीं होता हो, तो अदालत एफआईआर रद्द कर सकती है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले “स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम भजन लाल (1992)” में भी उन परिस्थितियों को स्पष्ट किया गया है, जिनमें हाईकोर्ट एफआईआर को रद्द करने का अधिकार रखता है। हालांकि हत्या, हत्या के प्रयास, बलात्कार और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में अदालत आमतौर पर बेहद सावधानी बरतती है और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद ही कोई फैसला लेती है।