बाल हितैषी पंचायत के निर्माण को लेकर प्रशिक्षण सह कार्यशाला, विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर हुई चर्चा

सहरसा। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं कवच समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कवच परियोजना के अंतर्गत बाल हितैषी पंचायत के निर्माण को लेकर विभिन्न हितधारकों की भूमिका विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास को लेकर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

 

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कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई दिवेश शर्मा, कवच परियोजना के अभिजीत डे एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ईश्वर चंद्र मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन भगवान जी पाठक ने किया।

 

भगवान जी पाठक ने बताया कि एसएसईभीएस पिछले 36 वर्षों से बिहार के करीब 11 जिलों में कार्य कर रहा है। वहीं, कवच परियोजना बिहार के आठ जिलों सहित विभिन्न राज्यों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उनके सुरक्षित भविष्य और मॉडल जिला बाल संरक्षण प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बाल हितैषी पंचायत बनाने के लिए सभी हितधारकों को मिल-जुलकर प्रयास करना होगा।

 

सहायक निदेशक दिवेश शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते में सुनिश्चित बच्चों के अधिकारों और मिशन वात्सल्य के संबंध में प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके लिए सकारात्मक एवं सुरक्षित वातावरण तैयार करने से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।

 

कवच परियोजना से अभिजीत डे ने बाल हितैषी पंचायत की अवधारणा और इसके लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास से जुड़ी जरूरतों को पंचायत की योजनाओं में शामिल करना जरूरी है। साथ ही पंचायत उन्नति सूचकांक के संधारण और उसके प्रमुख बिंदुओं की जानकारी भी दी गई।

 

कवच परियोजना प्रबंधक प्रकाश कुमार ने कहा कि बाल हितैषी पंचायत के निर्माण के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।

 

कार्यशाला में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ईश्वर चंद्र मिश्रा, सदस्य अफसरी इल्ताफ व पंचम नारायण सिंह, बाल संरक्षण पदाधिकारी मृगशेखर श्रीवास्तव सहित जिले के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी प्रतिभागियों ने सुपौल को बाल हितैषी जिला बनाने का संकल्प लिया।

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