सहरसा: बिहार के सहरसा जिला स्वास्थ्य समिति में सिविल सर्जन और जिला समन्वयक समीर कुमार गुप्ता के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। डेटा एंट्री ऑपरेटर की उपस्थिति विवरणी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब आधिकारिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव ने दो अलग-अलग पत्र जारी कर एक अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि संबंधित एजेंसी के प्रबंधक से जिला समन्वयक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।
दरअसल, शुक्रवार 6 नवंबर को जिला स्वास्थ्य समिति में डेटा एंट्री ऑपरेटर की उपस्थिति विवरणी को लेकर अधिकारियों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद सिविल सर्जन ने जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी कंचन कुमारी को पत्र जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
पत्र में कहा गया है कि जिला समन्वयक समीर कुमार गुप्ता ने उर्मिला एजेंसी में कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर की उपस्थिति विवरणी प्रस्तुत की थी, लेकिन उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। सिविल सर्जन का आरोप है कि दस्तावेज मांगने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया और उपस्थिति विवरणी पर हस्ताक्षर कराने के बाद संबंधित कागजात टेबल पर छोड़ दिए गए।
इतना ही नहीं, पत्र में राज्यस्तरीय अधिकारियों को भ्रामक जानकारी देने और मीडिया कर्मियों को बुलाकर सिविल सर्जन की छवि खराब करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया है।
वहीं, दूसरे पत्र के जरिए उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पटना के प्रबंधक से जिला समन्वयक समीर कुमार गुप्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
गौरतलब है कि समीर कुमार गुप्ता ने भी पहले सिविल सर्जन पर दुर्व्यवहार करने और थप्पड़ मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। हालांकि, सिविल सर्जन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने केवल फाइल को लेकर फटकार लगाई थी।
फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में जिला स्वास्थ्य समिति के अधिकारियों के बीच बढ़ता विवाद अब जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।





