पटना: बिहार में ठंड की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी पटना समेत प्रदेश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। कहीं वाहनों का धुआं, तो कहीं निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और दिवाली के पटाखों का असर देखने को मिल रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पटना में AQI करीब 350 दर्ज किया गया है। वहीं बक्सर में 441, सहरसा में 564, मोतिहारी में 467, मुजफ्फरपुर में 444, सासाराम में 407 और सिवान में 401 तक पहुंच गया है। इसके अलावा बेतिया में 364, छपरा में 342, समस्तीपुर में 337 और बिहारशरीफ में करीब 332 AQI दर्ज किया गया है। हालांकि अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों और समय के अनुसार आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। ठंड के मौसम में तापमान गिरने, हवा की रफ्तार कम होने और वातावरण में नमी बढ़ने से प्रदूषक कण लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं। वहीं दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण को और बढ़ा देता है।
इसके अलावा सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या, ट्रैफिक जाम, पुराने वाहनों से निकलने वाला धुआं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। सड़क निर्माण और भवन निर्माण के दौरान उड़ने वाले बारीक कण हवा को दूषित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह स्थिति चिंताजनक है। AQI 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसी हवा में लंबे समय तक रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस संबंधी परेशानी हो सकती है। वहीं बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
फिलहाल बिहार के कई शहर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए और लोग भी अनावश्यक धुएं और धूल से बचाव करें।





