**धनबाद:** “राम नाम सत्य है…” की गूंज, गाजे-बाजे की धुन और अंतिम विदाई देने के लिए जुटे मोहल्ले के लोग। यह नजारा किसी इंसान की अंतिम यात्रा का नहीं, बल्कि एक बेजुबान जानवर का था। जी हां, इंसान और बेजुबान जानवर के बीच प्रेम और अपनापन की अनोखी मिसाल धनबाद के बरमसिया में देखने को मिली। यहां सियारो नाम के एक कुत्ते की मौत पर पूरा मोहल्ला भावुक हो गया। लोगों ने उसे सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानकर सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।
जानकारी के अनुसार, बीते 25 अक्टूबर को बरमसिया में सियारो नाम के कुत्ते की मौत हो गई थी। उसके निधन की खबर से मुन्ना जी सहित मोहल्ले के लोग काफी दुखी हो गए। सियारो लंबे समय से इलाके के लोगों के बीच रह रहा था। उसके साथ लोगों का ऐसा जुड़ाव हो गया था कि वह धीरे-धीरे पूरे मोहल्ले का चहेता बन गया था।
सियारो की मौत के बाद मोहल्ले के लोगों ने मिलकर उसकी अंतिम यात्रा निकालने का फैसला किया। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान ‘राम नाम सत्य है’ के उद्घोष के बीच लोगों ने उसे अंतिम विदाई दी और विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। अंतिम यात्रा में लोगों की भागीदारी ने यह दिखा दिया कि सियारो ने अपने छोटे से जीवन में कितने लोगों के दिलों में जगह बनाई थी।
अब मोहल्ले के लोगों ने सियारो की याद को संजोकर रखने के लिए 6 नवंबर को भोज आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस आयोजन के जरिए लोग उसके साथ बिताए पलों को याद करेंगे।
बरमसिया की यह घटना समाज को एक भावुक संदेश देती है कि प्रेम, संवेदना और रिश्तों की कोई सीमा नहीं होती। कभी-कभी एक बेजुबान जानवर भी अपने स्नेह और वफादारी से पूरे मोहल्ले के परिवार का हिस्सा बन जाता है।








