गोपालगंज जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कुत्ते और अन्य जानवरों के काटने पर लगाए जाने वाले रेबीज रोधी टीके की कमी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में टीका उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नए स्टॉक के लिए मांग-पत्र भेज दिया गया है और जल्द ही टीकों की नई खेप उपलब्ध होने की उम्मीद है।
गोपालगंज जिले में रेबीज रोधी टीकों की कमी से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। कुत्ते या अन्य जानवरों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीका नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण दूर-दराज के इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में जिलाधिकारी डॉ. समीर सौरभ के विशेष प्रयास से जिले को रेबीज रोधी टीके की 2,400 डोज उपलब्ध कराई गई थीं। लेकिन मरीजों की भारी संख्या और टीकों की अधिक मांग के कारण पूरा स्टॉक महज तीन दिनों में समाप्त हो गया। इसके बाद सदर अस्पताल से लेकर रेफरल अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक टीकों की उपलब्धता का संकट फिर गहरा गया है।
टीकों की कमी के चलते अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए निजी मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदना मुश्किल हो रहा है।
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. मोहम्मद इसराइल ने बताया कि जिलाधिकारी के प्रयास से पहले 2,400 रेबीज रोधी टीके उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन अत्यधिक मांग के कारण वे तीन दिनों में ही खत्म हो गए। उन्होंने बताया कि नए स्टॉक के लिए मांग-पत्र यानी इंडेंट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया गया है।
सिविल सर्जन के मुताबिक, जिलाधिकारी के प्रयास से जल्द ही टीकों की नई खेप मिलने की उम्मीद है। इसके बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों को फिर से नि:शुल्क रेबीज रोधी टीका उपलब्ध कराया जा सकेगा। अब देखना होगा कि जिले में टीकों की नई खेप कब तक पहुंचती है और मरीजों को इस संकट से कब राहत मिलती है।





