बिहार में रंगमंच, नाटक और संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थाएं लगातार प्रयास कर रही हैं। इसी कड़ी में शहर के डाकबंगला मोड़ के पास श्री नालंदा नाट्य संघ की ओर से दुर्गा पूजा के अवसर पर दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में गीत-संगीत के साथ नाटक का मंचन भी होगा। आयोजन की तैयारियों को लेकर परविन्दर इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक और समाजसेवी अरविंद कुमार सिन्हा ने संस्था के कलाकारों एवं सदस्यों के साथ बैठक की।
श्री नालंदा नाट्य संघ की ओर से प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा के मौके पर नवमी और दशमी तिथि को दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम में कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। गीत-संगीत के साथ विभिन्न नाटकों का मंचन भी किया जाता है। इस वर्ष भी कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
तैयारियों की समीक्षा के दौरान समाजसेवी अरविंद कुमार सिन्हा ने कहा कि रंगमंच, नाटक और संगीत हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। इन विधाओं को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इन्हें बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कलाकारों और कला के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को हरसंभव सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने श्री नालंदा नाट्य संघ को आवश्यक मदद देने का भरोसा भी दिलाया।
संस्था के कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के पहले दिन लघु नाटक और गीत-संगीत की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही संस्था में प्रशिक्षण लेने वाले बच्चे भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, कार्यक्रम के दूसरे दिन भगवान शिव के विवाह पर आधारित ‘शिव-विवाह’ नाटक का मंचन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि श्री नालंदा नाट्य संघ छह दशक से भी अधिक समय से कला और संस्कृति के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। संस्था के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
बैठक में अनिल कुमार गुड्डू, संजय कुमार डिस्को, पृथ्वीनाथ, ऋषिकेश कुमार ऋषि, करण कुमार, पिंटू कुमार, शंभू साव, राकेश साव, चितरंजन कुमार, विनोद तांती, अलचु कुमार, राजेश कुमार, मुन्ना पुरी, शशिकांत कुमार, भृगुनाथ और विनोद कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
रंगमंच और लोक संस्कृति को प्रोत्साहन देने की यह पहल कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ परंपरागत कला को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





