सुपौल। कोसी नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से तटबंध के अंदर बसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इस साल पहली बार कोसी नदी में पानी का डिस्चार्ज 3 लाख 16 हजार 795 क्यूसेक के पार पहुंच गया। नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ तटबंध के अंदर बसे कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर जाने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
कोसी के उफान के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर घरों के आसपास पानी जमा हो गया है, जबकि कुछ घरों के अंदर तक बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
वहीं, पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे की समस्या भी उत्पन्न होने लगी है। पानी के बढ़ते फैलाव से खेत-खलिहान प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोसी नदी का पानी बढ़ने के साथ तटबंध के अंदर बसे गांवों में बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है। पानी का फैलाव बढ़ने से लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है। ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कोसी के जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। तटबंधों की सुरक्षा और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों से नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने तथा सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
फिलहाल कोसी का बढ़ता जलस्तर तटबंध के अंदर बसे लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अगर नदी का जलस्तर और बढ़ता है, तो प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।







