सहरसा। स्थानीय प्रमंडलीय पुस्तकालय के सभागार में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, कोसी प्रमंडल के तत्वावधान में प्रमंडल स्तरीय विज्ञान ड्रामा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जिले की चयनित छात्र टीमों ने हिस्सा लिया। विज्ञान आधारित विषयों पर विद्यार्थियों की आकर्षक नाट्य प्रस्तुतियों ने मौजूद दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक मो. सईद अंसारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मिथिलेश कुमार और मुक्तेश्वर सिंह मुकेश ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान अतिथियों ने कहा कि विज्ञान को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग, रचनात्मकता और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान ड्रामा जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक दृष्टिकोण, रचनात्मक क्षमता और टीम भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस तरह के आयोजन बच्चों को विज्ञान के विषयों को सरल और रोचक तरीके से समझने का अवसर भी देते हैं।
प्रतियोगिता में तीनों जिलों से चयनित टीमों ने विज्ञान आधारित अलग-अलग विषयों पर नाट्य प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों ने अभिनय, संवाद, वैज्ञानिक तथ्यों और मंचीय कौशल के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों में वैज्ञानिक विषयों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
प्रतियोगिता के परिणाम में उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय झिटकिया, घैलाढ़, मधेपुरा की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। फूलदाय कन्या उच्च विद्यालय, बनगांव, सहरसा की टीम दूसरे स्थान पर रही। वहीं सरस्वती विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुपौल की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया।
निर्णायक मंडल में कृष्ण कुमार, राजीव कुमार, कुमार विक्रमादित्य और श्रीमती आरती कुमारी शामिल रहे। निर्णायकों ने विषय-वस्तु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अभिनय, संवाद, प्रस्तुति और मंचीय प्रभाव समेत विभिन्न निर्धारित मानकों के आधार पर टीमों का मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन आनंद कुमार झा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के ओम शंकर, शुभेंदु कुमार और शशिभूषण कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों, विद्यार्थियों और अतिथियों ने सभी प्रतिभागी टीमों की प्रस्तुतियों की सराहना की। आयोजन ने यह संदेश दिया कि विज्ञान को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़कर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और सीखने की रुचि को और प्रभावी बनाया जा सकता है।





