पटना: बिहार की राजनीति में फरक्का जल संधि एक बार फिर बड़ा मुद्दा बनने जा रही है। जनता दल यूनाइटेड यानी JDU ने गंगा किनारे बसे 12 जिलों में ‘नीतीश संवाद’ अभियान चलाने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से होगी। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा खुद अभियान की कमान संभालेंगे, जबकि प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा समेत कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में शामिल होंगे।
JDU का कहना है कि फरक्का बराज और 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि से बिहार को लंबे समय से पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान हो रहा है। पार्टी के मुताबिक, गंगा में बढ़ती गाद और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव के कारण बाढ़ की समस्या गंभीर हुई है। वहीं गर्मी के मौसम में पानी की कमी से सिंचाई और पेयजल जैसी चुनौतियां बढ़ती हैं।
गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि का 30 साल का समझौता इसी साल 16 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। JDU केंद्र सरकार से मौजूदा समझौते को आगे नहीं बढ़ाने और बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से बातचीत की मांग कर रही है।
‘नीतीश संवाद’ के तहत बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में लोगों से संवाद किया जाएगा। पहले चरण में बक्सर के अलावा भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया में कार्यक्रम होंगे।
JDU नेता शीला मंडल के मुताबिक, नीतीश कुमार लंबे समय से फरक्का बराज के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। पार्टी का दावा है कि गाद जमने से गंगा की गहराई और प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है, जिसका असर बाढ़, सुखाड़ और जलीय जीवों पर भी पड़ रहा है।
राजनीतिक जानकारों की नजर में यह अभियान सिर्फ जल विवाद तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा से जुड़े लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश भी इसमें दिखाई देती है। अब देखना होगा कि फरक्का का मुद्दा JDU को कितना राजनीतिक फायदा दिलाता है और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।






