सहरसा नवहट्टा प्रखंड में कोसी नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। डरहार पंचायत और बकुनिया पंचायत के नदी किनारे बसे इलाकों में कटाव जारी रहने से लोगों के बीच घर, जमीन और जीवनभर की जमा पूंजी नदी में समा जाने का डर बना हुआ है। कटाव प्रभावित परिवार अब प्रशासन से तत्काल सुरक्षा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
नदी के किनारे बसे कई इलाकों में कटाव का खतरा लगातार बना हुआ है। खासकर महादलित टोलों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कटाव रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कई परिवारों के आशियाने कोसी की धारा में समा सकते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, कोसी नदी का मिजाज हर साल लोगों के लिए परेशानी लेकर आता है। नदी की धारा में बदलाव और कटाव के कारण किनारे की जमीन लगातार कमजोर हो रही है। इससे लोगों को अपने घर और खेत बचाने की चिंता सता रही है। कई परिवारों को आशंका है कि स्थिति और बिगड़ी तो उन्हें अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश करनी पड़ सकती है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
कटाव की समस्या को लेकर डरहार पंचायत के युवा रामकुमार मुखिया ने जिला प्रशासन और अंचलाधिकारी को आवेदन देकर तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कटाव प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के इंतजाम करने के साथ-साथ कटाव रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
रामकुमार मुखिया ने गरीब, दलित और महादलित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जिन परिवारों के घर और जमीन कटाव की चपेट में हैं, उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
बेघर होने का डर
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से कटाव प्रभावित परिवारों के जान-माल की सुरक्षा, राहत-बचाव और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। देखना होगा कि कटाव प्रभावित डरहार और बकुनिया पंचायत में कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर क्या व्यवस्था की जाती है।






