पटना: बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार की उद्योग नीति और निवेश समझौतों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने परमाणु क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए जिस कंपनी के साथ MoU किया है, वह महज कुछ महीने पहले ही अस्तित्व में आई है।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि जिस कंपनी के पास सामान्य निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है, वह बिहार में हजारों करोड़ रुपये का परमाणु क्षेत्र में निवेश कैसे करेगी। उनके मुताबिक, संबंधित कंपनी की स्थापना 25 फरवरी 2026 को हुई और उसकी कुल पूंजी करीब 11 लाख रुपये है।
तेजस्वी ने सरकार से पूछा कि अगर कंपनी इतनी बड़ी परियोजना में निवेश करने जा रही है, तो उसके पास इतना बड़ा निवेश करने के संसाधन कहां से आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार करीब 51,500 करोड़ रुपये के नए निवेश MoU का प्रचार कर रही है, लेकिन वर्ष 2024, 2025 और उससे पहले हुए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने अधिकारियों और मंत्रियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इतने बड़े निवेश के दावे के बावजूद किसी ने कंपनी की क्षमता और वित्तीय स्थिति पर सवाल क्यों नहीं उठाया। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं भविष्य में ऐसी कंपनियों को सरकारी जमीन और सब्सिडी का लाभ तो नहीं दिया जाएगा।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बड़ी और सक्षम कंपनियां बिहार में निवेश करें तो उनका स्वागत होना चाहिए और सरकार को हरसंभव सहयोग देना चाहिए। लेकिन केवल कागजी MoU के जरिए निवेश का माहौल बनाने से बिहार की औद्योगिक तस्वीर नहीं बदलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार को निवेशकों का भरोसा जीतने, आधारभूत संरचना सुधारने और धरातल पर उद्योग स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से सभी निवेश समझौतों की पारदर्शी प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।






