भागलपुर में बिहार कृषि विश्वविद्यालय का 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह, कुलपति बोले- ‘शोध आज की सबसे बड़ी देशभक्ति है’

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह राष्ट्रभक्ति, उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स और सुरक्षा दल के सदस्य मौजूद रहे।

 

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ध्वजारोहण से पहले कुलपति ने एनसीसी कैडेट्स और सुरक्षा दल की परेड का निरीक्षण किया। इसके बाद वंदे मातरम् की प्रस्तुति के बीच ध्वजारोहण हुआ और छात्राओं ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया।

 

इस अवसर पर कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि पूर्वजों के त्याग को याद करने, वर्तमान उपलब्धियों का मूल्यांकन करने और भविष्य के भारत के निर्माण का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि निरंतर जिम्मेदारी भी है। अब देश को ज्ञान, शोध, नवाचार, कृषि और किसान सशक्तिकरण के क्षेत्र में आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।

 

कुलपति ने कहा कि कृषि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। आज चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि, जल एवं मृदा संरक्षण, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय व सम्मान की रक्षा करने की है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि भारत के अगले अध्याय के लेखक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “शोध आज की सबसे बड़ी देशभक्ति है।”

 

कुलपति ने बताया कि वर्ष 2025-26 में विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं और सीएसआर सहयोग से विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को करीब 1970 लाख रुपये की अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। विश्वविद्यालय के नाम अब तक 32 पेटेंट, 29 कॉपीराइट और एक ट्रेडमार्क दर्ज हैं।

 

उन्होंने किसान-केंद्रित शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘बिहार कृषि विश्वविद्यालय किसान समस्या बैंक’, ‘वन स्टूडेंट–वन फार्मर–वन सॉल्यूशन’ और ‘किसान प्रोफेसर योजना’ जैसी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही ‘एएसएसआईएसटी मॉड्यूल’ के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव देने की बात कही।

 

समारोह में उत्कृष्ट योगदान के लिए एनसीसी कैडेट्स, विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों समेत कई लोगों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। अंत में विश्वविद्यालय परिवार ने आत्मनिर्भर कृषि, सशक्त किसान, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

 

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