पूर्व विधायक डॉ. विशेश्वर खां की 12वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, जादुपेटिया कलाकारों की बदहाली देख भावुक हुईं सुष्मिता खां

जामताड़ा नाला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं झारखंड विधानसभा के पूर्व प्रोटेम स्पीकर स्वर्गीय डॉ. विशेश्वर खां की 12वीं पुण्यतिथि शनिवार को फतेहपुर प्रखंड के सालपातड़ा गांव में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में बीएनटीसी एजुकेशनल फाउंडेशन की सुष्मिता खां सहित ग्रामीणों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान लोगों ने उनके सामाजिक, राजनीतिक और जनसेवा से जुड़े योगदान को याद किया।

 

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ग्रामीणों ने सुष्मिता खां का माला पहनाकर, गुलदस्ता और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। सुष्मिता खां ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. विशेश्वर खां उनके दादाजी थे और उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। जरूरतमंदों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

जादुपेटिया कलाकारों की स्थिति देख जताई चिंता

 

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद सुष्मिता खां सालपातड़ा गांव के जादुपेटिया चित्रकार टोले में पहुंचीं और कलाकार परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कच्ची सड़क, झोपड़ीनुमा मकान, पेयजल और रोजगार जैसी समस्याओं की जानकारी ली। कलाकारों ने आर्थिक तंगी और रोजगार के संकट से भी उन्हें अवगत कराया।

 

सुष्मिता खां ने जादुपेटिया चित्रकलाओं को देखा और कलाकारों से उनकी परंपरा के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इतनी समृद्ध पारंपरिक कला को जीवित रखने वाले कलाकारों को यदि भीख मांगकर जीवनयापन करना पड़े, तो यह बेहद दुखद है। कलाकारों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

 

जीआई टैग के बावजूद नहीं बदली जमीनी तस्वीर

 

जादुपेटिया चित्रकला को जीआई टैग मिलने के बाद इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिली है, लेकिन कलाकारों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। कई परिवार आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं और पेयजल व रोजगार की समस्या बनी हुई है। आर्थिक मजबूरी के कारण नई पीढ़ी भी पारंपरिक कला से दूर हो रही है।

 

चित्रकारों ने बताया कि जगन्नाथ पट, यम पट, संथाल जन्म पट, चक्षुदान पट और कृष्ण पट सहित कई पारंपरिक चित्रों के माध्यम से वे पीढ़ियों से कथा वाचन और कला प्रदर्शन करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जीआई टैग की पहचान तभी सार्थक होगी, जब उसका लाभ कलाकारों के घर तक पहुंचे और उन्हें आवास, रोजगार, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता तथा बाजार उपलब्ध हो।

 

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और जादुपेटिया चित्रकार समुदाय के लोग मौजूद रहे।

 

संवाददाता: संतोष कुमार, जामताड़ा

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