पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और अब बांकीपुर उपचुनाव में महागठबंधन की हार के बाद गठबंधन के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर की जीत के बाद कांग्रेस ने महागठबंधन की मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता और पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा ने तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए जन सुराज पार्टी को भी विपक्षी गठबंधन में शामिल करने की वकालत की है।
ऋषि मिश्रा ने कहा कि बांकीपुर चुनाव के नतीजे से यह साफ है कि जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करना चाहती है, लेकिन विपक्षी दलों पर भी उसका भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन लंबे समय से साथ है, इसके बावजूद लगातार चुनावी हार चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, 2015 को छोड़ दें तो गठबंधन पिछले कई चुनावों में लगातार पिछड़ता रहा है।
253 उम्मीदवारों से हो समीक्षा
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2025 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सभी 243 सीटों पर उतरे उम्मीदवारों और गठबंधन से जुड़े नेताओं की बैठक होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी उम्मीदवारों से सीधे बातचीत कर यह पता लगाया जाए कि चुनाव में कहां रणनीतिक चूक हुई और जनता का समर्थन क्यों नहीं मिला।
कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट होने की अपील
ऋषि मिश्रा ने कहा कि अगर भाजपा को सत्ता से हटाना है तो विपक्षी दलों को कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट होना चाहिए। उन्होंने 1977 और 1989 के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी अलग-अलग दल कांग्रेस को चुनौती देने के लिए एक मंच पर आए थे। उनका तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दलों को एक साझा नेतृत्व की जरूरत है।
प्रशांत किशोर को साथ आने का न्योता
ऋषि मिश्रा ने प्रशांत किशोर से भी गठबंधन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जन सुराज के विजन और कांग्रेस की विचारधारा में कई समानताएं हैं और जनता का एक वर्ग प्रशांत किशोर पर भरोसा करता है। उनके अनुसार, बिहार में कांग्रेस को नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।
तेजस्वी से मंथन की मांग
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अगर तेजस्वी यादव ही गठबंधन का नेतृत्व करना चाहते हैं तो उन्हें सभी सहयोगी दलों और उम्मीदवारों के साथ बैठकर हार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी हार के बावजूद अगर नेतृत्व और रणनीति में बदलाव नहीं होगा, तो सत्ता परिवर्तन की जनता की इच्छा पूरी कैसे होगी?





