
सहरसा जिले में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ का असर लगातार गंभीर होता जा रहा है। नवहट्टा प्रखंड के गढ़िया और रसलपुर के बीच बना संपर्क पुल तेज बहाव की चपेट में आकर टूट गया है। पुल ध्वस्त होने के बाद आसपास के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इससे लोगों को आवागमन, इलाज, शिक्षा और दैनिक जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कोसी की बाढ़ हर साल उनके लिए बड़ी त्रासदी बनकर आती है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। उनका आरोप है कि नवहट्टा और महिषी प्रखंड की करीब सात पंचायतें हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आ जाती हैं। कई परिवारों के घर नदी में समा जाते हैं, लोगों को विस्थापित होना पड़ता है और महीनों तक सामान्य जनजीवन प्रभावित रहता है। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई है।
इधर, गुरुवार को सहरसा पहुंचे बिहार सरकार के लघु एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन से जब बाढ़ की स्थायी समस्या को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग उनके पास नहीं है, लेकिन बिहार सरकार बाढ़ से निपटने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब स्थिति काफी बेहतर हुई है। तीन लाख क्यूसेक तक पानी आने पर भी चैनलाइजेशन के माध्यम से पानी का बेहतर वितरण किया जाता है, जिससे नुकसान कम होता है। साथ ही फ्लड फाइटिंग के कार्य और प्रभावित लोगों के विस्थापन की व्यवस्था भी समय-समय पर की जाती है।
मंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए लगातार प्रयासरत है। वहीं, कोसी नदी में बढ़ती गाद (सिल्ट) की समस्या पर उन्होंने कहा कि इस विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा, ताकि इसके स्थायी समाधान पर विचार किया जा सके।
हालांकि, बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों का कहना है कि केवल राहत और बचाव कार्य पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को अब ऐसी स्थायी योजना लागू करनी चाहिए, जिससे हर साल आने वाली बाढ़ और उसके कारण होने वाली तबाही से लोगों को हमेशा के लिए राहत मिल सके।
संवाददाता : इन्द्रदेव जी






