अररिया: बिहार के अररिया जिले के प्रसादपुर पंचायत के घोड़माड़ा गांव में पनार नदी का लगातार हो रहा कटाव ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। नेपाल के तराई क्षेत्र से निकलने वाली यह नदी हर साल बाढ़ के साथ तबाही मचाती है, लेकिन इस बार जलस्तर घटने के बाद भी तेज कटाव जारी है। नदी गांव के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिससे कई परिवारों के घर और जमीन खतरे में हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार अब तक चार से पांच घर नदी में समा चुके हैं, जबकि दर्जनों परिवार हर पल अपने आशियाने को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वार्ड संख्या-2 के निवासी मो. आलम का कहना है कि कटाव के कारण लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और गांव में आवागमन भी प्रभावित हो गया है। उन्होंने प्रशासन से स्थायी कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है।
ग्रामीण नाजरीन बताती हैं कि उनका घर नदी के बिल्कुल किनारे पहुंच गया है। रात में डर के कारण परिवार का एक सदस्य जागकर पहरा देता है। उन्होंने मजदूरी कर नया मकान बनाया, लेकिन कटाव के डर से अब तक प्लास्टर भी नहीं करा सकी हैं।
गांव के मो. अनवर का कहना है कि यदि नदी का बहाव पहले वाली दिशा में मोड़ दिया जाए तो गांव को काफी राहत मिल सकती है। उनका आरोप है कि हाल ही में फ्लड फाइटिंग के तहत बोरी में बालू और मिट्टी भरकर कटाव रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन तेज बहाव में अधिकांश सामग्री बह गई और राहत कार्य बेअसर साबित हुआ।
वार्ड संख्या-3 के नसीम हुसैन ने बताया कि उनके परिवार के तीन मकान कटाव की चपेट में आ चुके हैं। बांस के झुरमुट और पेड़-पौधे भी नदी में बह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारियों ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं सुना।
वहीं, जोकीहाट के अंचल अधिकारी हर्ष हरि ने कहा कि फ्लड फाइटिंग टीम के माध्यम से कटाव रोकने का कार्य कराया गया है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जहां आवश्यकता होगी, वहां आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि खतरा अभी टला नहीं है। यदि जल्द स्थायी कटावरोधी उपाय और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में कई और घर पनार नदी में समा सकते हैं।





