बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहा संकट अब फिलहाल टलता हुआ दिखाई दे रहा है। बीजेपी ने उन्हें विधान परिषद पहुंचाने के लिए अपने ही विधान पार्षद देवेश कुमार से इस्तीफा दिला दिया है।
जानकारी के अनुसार, देवेश कुमार ने विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात कर अपनी सदस्यता से इस्तीफा सौंप दिया। मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक के बाद इस फैसले पर सहमति बनी। अब योजना है कि देवेश कुमार की खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जाए। देवेश कुमार का कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था, जिसे अब दीपक प्रकाश पूरा कर सकते हैं।
देवेश कुमार लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं। वे एबीवीपी की छात्र राजनीति से निकले, जेएनयू में सक्रिय रहे और बाद में पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया। बीजेपी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता, उपाध्यक्ष, मुख्यालय प्रभारी और बाद में राज्यपाल कोटे से एमएलसी बनाया था। पार्टी संगठन में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।
दरअसल, दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे, लेकिन उस समय वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। संविधान के अनुसार छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है। इसी बीच 14 अप्रैल 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ मंत्रिमंडल भंग हो गया। बाद में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में 7 मई 2026 को नए मंत्रिमंडल का गठन हुआ और दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया, जबकि वे तब भी किसी सदन के सदस्य नहीं थे।
इसी नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से जवाब भी मांगा था। अब बीजेपी के इस कदम को उसी कानूनी संकट का समाधान माना जा रहा है।
वहीं विपक्ष ने इस फैसले पर राजनीतिक निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव में हुए ध्रुवीकरण के बाद बीजेपी बैकफुट पर है और कुशवाहा वोट बैंक को साधने के लिए अपने ही एमएलसी से इस्तीफा दिलाकर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी की गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।





