करोड़ों की लागत से बना अस्पताल सफेद हाथी बना, डॉक्टरों की कमी से बंद; पूर्व मुखिया ने दी जल समाधि की चेतावनी

बिहार सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड अंतर्गत चन्द्रायन पंचायत में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब तक मरीजों के इलाज का इंतजार कर रहा है। अस्पताल का भवन पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। इससे स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है।

 

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अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर बिजलपुर पंचायत के पूर्व मुखिया संजीव कुमार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल को जल्द चालू कराने की मांग करते हुए कहा कि भवन निर्माण पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन चिकित्सकों और कर्मियों की तैनाती नहीं होने से यह अस्पताल सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गया है।

 

उन्होंने कहा कि चन्द्रायन पंचायत सहित आसपास के कई गांवों के हजारों लोगों को इलाज के लिए आज भी दूर-दराज के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। खासकर आपात स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

पूर्व मुखिया संजीव कुमार ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि अस्पताल में जल्द से जल्द डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। इसके अलावा चिकित्सकों के रहने के लिए आवास की व्यवस्था, उनके आने-जाने के लिए सरकारी वाहन, मरीजों की सुविधा के लिए कम से कम दो एंबुलेंस और अस्पताल परिसर की सुरक्षा के लिए चारदीवारी निर्माण कराया जाए।

 

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए वह लगातार आवाज उठाते रहेंगे। पूर्व मुखिया ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दो महीने के अंदर अस्पताल को सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ चालू नहीं किया गया, तो वह जनहित के मुद्दे को लेकर जल समाधि लेने को मजबूर होंगे।

 

उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य अधिकार की लड़ाई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और ग्रामीणों को इस अस्पताल की सुविधा कब तक मिल पाती है।

 

संवाददाता – इन्द्रदेव जी सहरसा

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