देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण, बेरोजगारी और आंदोलनरत छात्र-युवाओं पर हो रही कार्रवाई के विरोध में सोमवार को बोकारो में भाकपा (माले) ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-युवा और पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे तथा केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और छात्र-युवाओं की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षा का निजीकरण होने से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है, जबकि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद सरकार युवाओं की समस्याओं के समाधान के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के नेता राजू दुबे ने आरोप लगाया कि 20 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्र-युवाओं की आवाज को सरकार ने नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और आंदोलनरत छात्रों पर की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को दमन के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान भाकपा (माले) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की अविलंब रिहाई, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने तथा आंदोलनरत छात्रों पर हो रही कार्रवाई बंद करने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने छात्र-युवाओं की मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो देशभर में आंदोलन को और व्यापक एवं तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि छात्र-युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
संवाददाता : चंदन सिंह






