बैंकों के राष्ट्रीयकरण की 57वीं वर्षगांठ के अवसर पर बैंक ऑफ इंडिया एम्प्लॉई यूनियन की ओर से रविवार को बोकारो के सेक्टर-4 स्थित मिलन मंडप में एक आम बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बैंक ऑफ इंडिया के बोकारो अंचल के बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में राष्ट्रीयकरण दिवस के महत्व, बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूनियन के अध्यक्ष सपन कुमार ने कहा कि वर्ष 1969 में देश के प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, जिसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना और देश के आर्थिक विकास को गति देना था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयकरण ने ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए चार लेबर कोड पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही आने वाले समय में बैंकिंग उद्योग के कर्मचारियों के सामने खड़ी चुनौतियों, बदलते कार्य परिवेश तथा कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श किया गया। यूनियन ने सरकार की बैंक निजीकरण की नीतियों पर भी चिंता जताई और इसके खिलाफ आगे की रणनीति तैयार करने पर चर्चा की।
इस अवसर पर यूनियन के उप महासचिव सिद्धेश नारायण दास ने कहा कि सरकार लगातार किसी न किसी रूप में राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण की दिशा में प्रयास कर रही है, जिसका कर्मचारी संगठन लगातार विरोध करता रहा है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी निजीकरण की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है तो यूनियन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।
बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने भी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने, सार्वजनिक बैंकों की भूमिका को बनाए रखने और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
संवाददाता : चंदन सिंह, बोकारो






