
बंगला पंचांग के अनुसार श्रावण माह के प्रथम दिन शुक्ल पक्ष के शनिवार को नाला प्रखंड क्षेत्र में मां बिपद्तारिणी पूजा श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। बंगाली समुदाय की महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सभी प्रकार के संकटों से रक्षा की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा तथा विधि-विधान से मां बिपद्तारिणी की पूजा-अर्चना की। सुबह से ही विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
नाला प्रखंड के दलाबड़ स्थित मां रक्षा काली मंदिर, आमलाजोड़ा दुर्गा माता मंदिर, सूड़ियापानी बजरंगबली मंदिर, नीचेपाड़ा शिव-पार्वती मंदिर, नलहटी, गोपालपुर, नतूनडीह, कुमिरदहा सहित कई गांवों के मंदिरों में एक साथ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। हजारों महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर मां बिपद्तारिणी से अपने परिवार की रक्षा और सुख-शांति की प्रार्थना की।
दलाबड़ गांव के पुरोहित रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने बताया कि मां बिपद्तारिणी पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पूजा में 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के फूल और 13 प्रकार के मिष्ठान अर्पित करने की परंपरा है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, पूजन और भोग अर्पित किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
दलाबड़ स्थित मां रक्षा काली मंदिर में सुबह करीब 11 बजे पूजा प्रारंभ हुई, जो शाम लगभग 4 बजे तक चली। पूजा में बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के श्रद्धालु शामिल हुए। पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने मां बिपद्तारिणी और पुरोहित के हाथों पवित्र लाल-पीला रक्षा सूत्र बंधवाकर अपना व्रत खोला। परंपरा के अनुसार इस धागे में 13 गांठें लगाई जाती हैं, जिसे संकटों से रक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मां बिपद्तारिणी की पूजा बंगाली समुदाय की आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं तथा घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ हर वर्ष महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव से यह व्रत रखती हैं।
संवाददाता: संतोष कुमार, जामताड़ा





