भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी 40 समूहों के टेंडर के विरोध में शनिवार को धनबाद जिला संवेदक संघ ने सामूहिक रूप से टेंडर प्रक्रिया का बहिष्कार किया। नई रॉयल्टी चालान व्यवस्था के विरोध में संवेदकों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उनका कहना है कि वर्तमान नीति के कारण निर्माण कार्यों और भुगतान प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शनिवार को धनबाद थाना परिसर में भवन निर्माण विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गई थी। हालांकि जिला संवेदक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में संवेदकों ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। संवेदकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नई रॉयल्टी चालान नीति व्यवहारिक नहीं है और इससे ठेकेदारों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
जिला संवेदक संघ के प्रतिनिधि सुनील कुमार सिंह ने बताया कि धनबाद में रॉयल्टी चालान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में संवेदकों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के चलते निर्माण कार्यों के बिलों का भुगतान भी प्रभावित हो रहा है, जिससे विकास योजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है।
संघ ने सरकार से मांग की कि पहले की तरह पुरानी व्यवस्था के तहत ही बिलों का भुगतान किया जाए, ताकि विकास कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें। संवेदकों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो वे आगे भी टेंडर प्रक्रिया और अन्य सरकारी कार्यों का बहिष्कार जारी रखेंगे।
संवेदक लक्ष्मण सिंह ने कहा कि सरकार की नीतियों के विरोध में जिले के सभी संवेदक एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि पूरे निर्माण क्षेत्र और विकास कार्यों को सुचारु रूप से संचालित रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से संवेदकों की व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की।
फिलहाल संवेदकों के टेंडर बहिष्कार से भवन निर्माण विभाग की कई परियोजनाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
संवाददाता: राजेश कुमार, धनबाद





