मुजफ्फरपुर: स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बावजूद मुजफ्फरपुर में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की स्थिति सवालों के घेरे में है। शहर के प्रमुख इलाकों में लगाए गए अधिकांश बायो टॉयलेट बंद पड़े हैं, जिससे खासकर महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और बाहर से आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कंपनीबाग पहुंचीं रेखा देवी बताती हैं कि कई बार जरूरी काम से शहर आने के बावजूद शौचालय की सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें बिना काम किए वापस लौटना पड़ा। उनका कहना है कि सरकार ने सुविधा तो बनाई, लेकिन उसे चालू रखने की व्यवस्था नहीं की।
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बैरिया रोड, मिठनपुरा, इमलीचट्टी, बस स्टैंड, कंपनीबाग और अन्य प्रमुख स्थानों पर 25 ग्रीन (बायो) टॉयलेट लगाए गए थे। लेकिन वर्तमान में इनमें से लगभग 75 प्रतिशत टॉयलेट बंद हैं। कहीं ताला लटका है, कहीं सफाई का अभाव है तो कहीं मशीनें और पानी की टंकियां क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। कई स्थानों पर अतिक्रमण और कचरे के कारण टॉयलेट तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
हर दिन इलाज, खरीदारी, बैंक, कोर्ट और अन्य कार्यों से हजारों लोग शहर आते हैं। विवाह सीजन में यह संख्या 50 से 70 हजार प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। ऐसे में सार्वजनिक शौचालय बंद रहने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूतापट्टी के व्यवसायी राजेश कुमार का कहना है कि उत्तर बिहार के सबसे बड़े कपड़ा बाजार और 32 से अधिक बैंक शाखाओं वाले शहर में सार्वजनिक शौचालय बंद रहना स्मार्ट सिटी योजना पर सवाल खड़े करता है। वहीं कांग्रेस नेता मयंक कुमार मुन्ना ने करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुविधाएं चालू नहीं होने की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मुजफ्फरपुर नगर निगम की डिप्टी मेयर डॉ. मोनालिसा ने बायो टॉयलेट और वाटर वेंडिंग मशीनों की बदहाल स्थिति स्वीकार करते हुए कहा कि अधिकांश संपत्तियों का हैंडओवर अभी स्मार्ट सिटी लिमिटेड से नगर निगम को नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि हैंडओवर के बाद मरम्मत, नियमित सफाई और क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदलकर सभी टॉयलेट और वाटर वेंडिंग मशीनों को जल्द चालू कराया जाएगा।








